रात्रिचर्या


रात्रिचर्या

रात्रि भोज — आयुर्वेद के अनुसार रात का भोजन सूर्य छिपने से पूर्व अथवा सूर्य छिपने केआस पास ही लेना चाहिए | क्यूंकि कुछ ऐसे भोज्य पदार्थ भी होते है जो देर रात पचने में मुश्किल होते हैं |

लाभ –  भोजन से नींद अच्छी रहती है | हृदय को बल प्रदान करता है | वजन कम करने में सहायक होता है |

हानि – देर रात रात्रि भोज से कई तरह की गंभीर बीमरियन हो जाती है | इससे मोटापे की शिकायत भी हो जाती है | हृदय तथा मानस रोगों की समस्या भी हो सकती है |

अभ्यंग ( मालिश ) अभ्यंग में हमें पुरे शरीर का मालिश नहीं करना है | इसमें केवल पैरों  की ही मालिश करनी है | क्यूंकि सूर्य छिपने से पहले किये हुए भोजन के पश्चात पैरों की मालिश सम्पूर्ण शरीर के लाभप्रद होती है | आयुर्वेद कहता है की पैर हमारे अनेकों नसों का केंद्र बिंदु होता है | इसलिए पैर की मालिश करने से शरीर की नसे सक्रिय होती हैं तथा शरीर भी विश्राम की स्थिति में चला जाता है | मालिश करने के लिए नारियल तेल, तिल तेल तथा सरसों का तेल उत्तम माना गया है |

मालिश से लाभ — अभ्यंग से रक्तप्रह्वा बेहतर रहता है | इससे चिंता तथा अवसाद दूर रहते हैं |यह निद्राचक्र को बेहतर रखने का सरल उपाए है |

रात्रि पेय – आयुर्वेद के अनुसार रात्रि में दूध का सेवन अच्छी नींद लाता है | दूध एक अपने आप में पोषण का खजाना है तथा इसके अंदर नो एमिनो एसिड्स पाए जातें हैं | इसे हमेसा रात्रि में अकेला ही लेना चाहिए इसके साथ भोजन का सेवन न करें | गाय के दूध को सर्वोत्तम माना गया है | परन्तु आज के युग में देसी गाये का दूध मिलना बड़ी मुश्किल की बात है इसलिए रात्रि में दूध का प्रयोग न करें |

लाभ — दूध में ट्रीप्टोफन और मेलाटोनिन पाया जाता है क्यूंकि ये नींद लेन में मददगार होते है इसीलिए इन्हे रात्रि में दिया जाता है |

हानि — दूध को अतिसार, दमा, अफारा, लैक्‍टोज असहिष्‍णुता में नहीं देना चाहिए |

मानसिक स्थिलता – इसके अंतर्गत मन को आराम देने के बारे में बताया गया है | सोने से पूर्व अपने मन को किन तरीकों से हम पुरे दिन की मानसिक थकावट से दूर अथवा आराम दे सकतें है | सोने से पहले कुछ समय दे उस समय में ध्यान करें जिससे की मन शांत हो सके | पूरा दिन की थकान से मुक्त हो सके | कुछ हलके योग के आसान करें | मधुर संगीत सुने | गरम पानी से स्नान किया जा सकता है | धार्मिक किताबें पढ़ी जा सकती हैं |

लाभ –  ऊपर बताये गए तरीकों से मनन को शांत रखा जा सकता है | एक अच्छी नींद लेने के लिए इन तरीकों को अपनाया जा सकता है |

निद्रा  निद्रा लेने का सही और उत्तम समय रात्रि ९ बजे से १० बजे के बीच में है | और निद्रा कम से कम ७-८ घंटे की तो होनी ही चाहिए अगर आप स्वस्थ रहना चाहतें हैं | तथा ब्रह्ममुहृत में उठना परन्तु यह तभी संभव है जब आप रात्रि १० बजे तक सो जाएंगे |

लाभ – पूर्ण निद्रा ही पूर्ण स्वस्थ्य दे सकती है | शरीर के सातों चक्रों को बैलेंस रखने में सहायक है| सुबह उठते ही स्फूर्ति का अनुभव रहता है |

हानि –– रात को देर रात जागना आपके निद्रा चक्र को खराब कर सकती है | आपके पाचन को खराब सकती है | नींद का अधूरा लेना आपकी ध्यान शक्ति को कमजोर बनाता है |

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