सिद्घिविनायक मंदिर


सिद्घिविनायक गणेश जी का सबसे लोकप्रिय रूप है। गणेश जी की जिन प्रतिमाओं की सूड़ दाईं तरह मुड़ी होती है, वे सिद्घपीठ से जुड़ी होती हैं और उनके मंदिर सिद्घिविनायक मंदिर कहलाते हैं। सिद्धि विनायक की महिमा अपरंपार है, वे भक्तों की मनोकामना को तुरंत पूरा करते हैं। मान्यता है कि ऐसे गणपति बहुत ही जल्दी प्रसन्न होते हैं और उतनी ही जल्दी कुपित भी होते हैं। सिद्धी विनायक मंदिर भारत के रईस मंदिरों में से एक माना जाता है। इस मंदिर को 3.7 किलोग्राम सोने से कोट किया गया है, जो कि कोलकत्ता के एक व्यापारी ने दान किया था। हिंदू भगवान गणपति को समर्पित इस मंदिर में सन 1900 से पर्यटक नियमित रूप से आते हैं। पहले यह ईंटों की बनी हुई कुछ फुट चौड़ी संरचना थी जो आज मुंबई का सबसे धनी मंदिर बन गया है और कई लोगों के दिल के बहुत करीब है। सावधान रहें, यदि आप सही समय और दिन में यहाँ नही पहुँचते हैं तो आपको कई घंटे लाइन में खड़ा रहना पड़ सकता है। मंदिर की वास्तुकला और पर्यटकों का प्रबंधन उल्लेखनीय है।

कोई भी शुभ काम शुरू करने से पहले भगवान गणेश की पूजा जरूर की जाती है। इस तरह की स्थिति को हम ‘श्रीगणेश’ के नाम से भी जानते हैं। मुंबई के प्रभादेवी में स्थित श्री सिद्धिविनायक मंदिर देश में स्थित सबसे पूजनीय मंदिरों में से एक है। यह मंदिर भगवान गणेश को समर्पित है। भक्त जब भी किसी नए काम की शुरुआत करता है तो इस मंदिर के दर्शन जरूर करता है। हर साल यहां लाखों श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं और भगवान गणेश की पूजा करते हैं। 

पौराणिक कथा 

मान्यता है कि जब सृष्टि की रचना करते समय भगवान विष्णु को नींद आ गई, तब भगवान विष्णु के कानों से दो दैत्य मधु व कैटभ बाहर आ गए। ये दोनों दैत्यों बाहर आते ही उत्पात मचाने लगे और देवताओं को परेशान करने लगे। दैत्यों के आंतक से मुक्ति पाने हेतु देवताओं ने श्रीविष्णु की शरण ली। तब विष्णु शयन से जागे और दैत्यों को मारने की कोशिश की लेकिन वह इस कार्य में असफल रहे। तब भगवान विष्णु ने श्री गणेश का आह्वान किया, जिससे गणेश जी प्रसन्न हुए और दैत्यों का संहार हुआ। इस कार्य के उपरांत भगवान विष्णु ने पर्वत के शिखर पर मंदिर का निर्माण किया तथा भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित की। तभी से यह स्थल ‘सिद्धटेक’ नाम से जाना जाता है। 

सिद्धिविनायक मंदिर का इतिहास 

मुंबई स्थित सिद्धिविनायक मंदिर का निर्माण 19 नवंबर, 1801 को लक्ष्मण विट्ठु और देउबाई पाटिल ने किया था। निर्माण के बाद भी समय-समय पर इस मंदिर को एक नया रूप दिया गया। महाराष्ट्र सरकार ने इस मंदिर के भव्य निर्माण के लिए जमीन प्रदान की जिस पर पांच मंजिला मंदिर का निर्माण किया गया। सिद्धिविनायक मंदिर के अंदर एक छोटे मंडपम में भगवान गणेश के सिद्धिविनायक रूप की प्रतिमा प्रतिष्ठापित की गई है। मंदिर में लकड़ी के दरवाजों पर अष्टविनायक को प्रतिबिंबित किया गया है। जबकि मंदिर के अंदर की छतें सोने के लेप से सुसज्जित की गई हैं। सिद्धिविनायक मंदिर की गिनती अमीर मंदिरों में की जाती है। इस मंदिर से करोड़ों रुपए की आय होती है। 

सिद्धिविनायक मंदिर का महत्व 

सिद्धिविनायक मंदिर उन गणेश मंदिरों में से एक है, जहां केवल हिन्दू ही नहीं, बल्कि हर धर्म और जाति के लोग दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। कहते हैं कि सिद्धि विनायक की महिमा अपरंपार है, वे भक्तों की मनोकामना को तुरंत पूरा करते हैं। मान्यता है कि ऐसे गणपति बहुत ही जल्दी प्रसन्न होते हैं और उतनी ही जल्दी कुपित भी होते हैं।

सिद्धिविनायक मंदिर भगवान गणेश के लोकप्रिय मंदिरों में से एक है। यहां पूरे साल भक्तों की भीड़ उमड़ती है। देश-विदेश से श्रद्धालु और पर्यटक भगवान गणेश के दर्शन के लिए यहां आते हैं। वैसे अगर आप भी सिद्धिविनायक मंदिर जा रहे हैं तो आप महालक्ष्मी मंदिर, चौपाटी और जूहू बीच, गेटवे ऑफ इंडिया, हाजी अली, माउंट मेरी चर्च जाना न भूलें। यह सारे लोकप्रिय स्थल सिद्धिविनायक मंदिर से कुछ ही किलोमीटर के अंदर स्थित हैं। ट्रेन और वायु मार्ग से आप आसानी से मुंबई पहुंचकर न केवल सिद्धिविनायक मंदिर के दर्शन कर पाएंगे बल्कि अन्य उपरोक्त पर्यटक स्थल से रूबरू हो पाएंगे। 

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