कालसर्प योग

ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार राहु ग्रह को अधिदेवता ‘काल’ माना जाता है। जबकि केतु को अधिदेवता ‘सर्प’ कहा जाता है और इन दोनों ग्रहों के नाम को मिलाकर ही इस दोष का नाम ‘कालसर्प’ रखा गया है। जब किसी इंसान की कुंडली में राहु और केतु ग्रह के बीच अन्य ग्रह आ जाते हैं, तब कुंडली में काल सर्प दोष का योग बनता है। ऐसा कहा जाता है कि इन दोनों ग्रहों के बीच अन्य ग्रहों के आ जाने से, ग्रहों से जुड़े लाभ इंसान को नहीं मिल पाते हैं। जिसकी वजह से इंसान के जीवन में परेशानियां आने लग जाती हैं। शास्त्रों के अनुसार कालसर्प योग कुल 12 तरह के होते हैं और इन 12 तरह के काल सर्प दोष के नाम इस प्रकार है-

अनंत कालसर्प दोष | कुलिक कालसर्प दोष | वासुकि काल सर्प दोष | शंखपाल कालसर्प दोष | पद्म कालसर्प दोष | महापद्म सर्प दोष | तक्षक दोष | कर्कोटक काल सर्प दोष | शंखनाद कालसर्प दोष | घातक कालसर्प दोष | विषाक्त दोष | शेषनाग दोष

जन्म  कुंडली में यदि रहू और केतु के बीच एक ही ताराफ सातों ग्रह(सू ,चं ,मं वृह ,शु ,श ) पड़ जाएँ तो काल सैप योग बनता है | इसके कारण जातक (पुरुष/स्त्री ) को व्यवसाय ,धन ,नौकरी ,परिवार तथ संतान आदि के कारण विविध परेशानियाँ दुःख एवं मानसिक तनाव से पीड़ित रहना पड़ता है I यह योग अन्य योगों की भांति जातक पर सकारात्मक प्रभाव भी देता है |

काल सर्प दोष शांति के उपाय

कालसर्प दोष शनि के लिए मुख्य रूप से 1.ग्रह शांति ,2.सर्प दोष , ३.पितृ दोष शांति एवं नागबलि एवं शिवपूजन वैदिक पुराणोक्त विधि से किसी योग्य ब्राह्मण द्वारा करानी चाहिए 4. विधिपूर्वक महामृत्युन्जय का जप भी करें |

यदि कुंडली में कालसर्प योग हो तो निम्नलिखित किंचित उपाय करने शुभ एवं कल्याण कारी होंगे

1. काल सर्प की अरिष्ट शांति के लिए शिव मंदिर में सवा  लाख  “ॐ नमः शिवाय मंत्र” का पाठ करना तथा पाठोप्रांत रुद्राभिषेक करवाने का विशेष महत्त्व है साथ ही शिवलिंग पर चांदी का सर्प युगल नाग स्तोत्र एवं नाग पुजनआदि करके चढ़ाना शुभ होगा |

नाग गायत्री मंत्र – “ॐ नव कुलाय विद्महे विशादंताय धीमहि तन्नोह सर्पः प्रचोदयात”

2.प्रत्येक शनिवार को एक नारियल को तेल एवं काले तिलों का तिलक लगाकर मौली लपेटकर अपने सर से तीन बार घुमाकर ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौम सः राहवे नमः | मंत्र कम से कम तीन बार पढ़कर पानी में बहा देवें एसा कम से कम पांच शनिवार करें |

३. प्रत्येक शनिवार कुत्तों को दूध और चपाती डालनी तथा गायों  कौओं को तेल की छीट रसोई देकर पहली चपाती बनाना शुभ है |

4.कालसर्प योग आदि के कारण यदि वैवाहिक जीवन में बाधा आती  है तो जातक पत्नी के साथ दुबारा विवाह करें एवं घर के चौखट द्वार पर चांदी  का स्वस्तिक चिह्न बनवाकर घर के द्वार पर लगवाएं |

5.घर में मयूर पंख का पंखा पवित्र स्थान पर रखें तथा भगवान् शिव का ध्यान करते हुए प्रात: उठते ही तथा सोने से पूर्व मयूर पंख से हवा करें |

6.प्रत्येक सक्रांति को गंगाजल सहित  गोमूत्र का छिडकाव घर के सभी कमरों में करें |

7. कालसर्प योग शांति के लिए नव नाग देवताओं के नाम का उच्चारण  करना चाहिए |

अनन्तं वासुकिं शेष पद्मनाभं च कम्बलम | शंख्पालम कार्कोटकं कालियं तक्षकं तथा ||

एतानि संस्मरेन्नित्यम आयु:कामार्थ सिद्धये | सर्पदोष क्षयार्थ च पुत्रपौत्रान स्मरिद्ध्ये ||

तस्मै विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत् ||