हिन्दू धर्म में तुलसी के पौधे को एक तरह से लक्ष्मी का रूप माना गया है। कहते है की जिस घर में तुलसी की पूजा अर्चना होती है उस घर पर भगवान श्री विष्णु की सदैव कृपा दृष्टि बनी रहती है। आपके घर में यदि किसी भी तरह की निगेटिव एनर्जी मौजूद है तो यह पौधा उसे नष्ट करने की ताकत रखता है। तुलसी की तासीर गर्म होती है तुलसी का पौधा घर के दक्षिणी भाग में नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि यह आपको फायदे के बदले काफी नुकसान पहुंचा सकता है। तुलसी की पूजा की जाती है, तुलसी में कई औषधीय गुण भी हैं। तुलसी का पौधा घर में उत्तर, उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा में लगाया जाना चाहिए। इन दिशाओँ में लगाए जाने से तुलसी का पौधा बरकत लाता है।

वैज्ञानिक नाम – Osmium Tenuiflorum

अन्य भाषाओं में तुलसी के नाम : Tamil : तुलसी Telugu : गग्गर चेट्टु Sanskrit : तुलसी, सुरसा, देवदुन्दुभि, अपेतराक्षस, सुलभा, बहुमञ्जरी, गौरी, भूतघ्नी Hindi : तुलसी, वृन्दा Odia : तुलसी Kannad : एंड तुलसी Gujrati : तुलसी Bengali : तुलसी Nepali : तुलसी Marathi : तुलसी Malyalam : कृष्णतुलसी Arab : दोहश

पंच तुलसी क्या है? यह पांच तरह की तुलसी का मिश्रण है, जिसमे राम तुलसी, मुगल तुलसी, वन तुलसी, श्याम तुलसी और बार्बरी तुलसी शामिल हैं।

तुलसी का महत्त्व

तुलसी (osmium sanctum) एक झाड़ीनुमा पौधा है। इसके फूल गुच्छेदार तथा बैंगनी रंग के होते हैं तथा इसके बीज घुठलीनुमा होते है। इसे लोग अपने आंगन में लगाते हैं । भारतीय संस्कृति में तुलसी के पौधे का बहुत महत्व है और इस पौधे को बहुत पवित्र माना जाता है। ऎसा माना जाता है कि जिस घर में तुलसी का पौधा नहीं होता उस घर में भगवान भी रहना पसंद नहीं करते। माना जाता है कि घर के आंगन में तुलसी का पौधा लगा कलह और दरिद्रता दूर करता है। इसे घर के आंगन में स्थापित कर सारा परिवार सुबह – सवेरे इसकी पूजा – अर्चना करता है। यह मन और तन दोनों को स्वच्छ करती है। इसके गुणों के कारण इसे पूजनीय मानकर उसे देवी का दर्जा दिया जाता है। तुलसी केवल हमारी आस्था का प्रतीक भर नहीं है। इस पौधे में पाए जाने वाले औषधीय गुणों के कारण आयुर्वेद में भी तुलसी को महत्वपूर्ण माना गया है। भारत में सदियों से तुलसी का इस्तेमाल होता चला आ रहा है।

तुलसी के फायदे

लिवर  संबंधी समस्या  तुलसी की 10 – 12 पत्तियों को गर्म पानी से धोकर रोज सुबह खाएं। लिवर की समस्याओं में यह बहुत फायदेमंद है।

पेटदर्द होना एक चम्मच तुलसी की पिसी हुई पत्तियों को पानी के साथ मिलाकर गाढा पेस्ट बना लें। पेटदर्द होने पर इस लेप को नाभि और पेट के आस-पास लगाने से आराम मिलता है।

पाचन संबंधी समस्या पाचन संबंधी समस्याओं जैसे दस्त लगना, पेट में गैस बनना आदि होने पर एक ग्लास पानी में 10 -15 तुलसी की पत्तियां डालकर उबालें और काढा बना लें। इसमें चुटकी भर सेंधा नमक डालकर पीएं।

बुखार आने पर दो कप पानी में एक चम्मच तुलसी की पत्तियों का पाउडर और एक चम्मच इलायची पाउडर मिलाकर उबालें और काढा बना लें। दिन में दो से तीन बार यह काढा पीएं। स्वाद के लिए चाहें तो इसमें दूध और चीनी भी मिला सकते हैं।

खांसी-जुकाम करीब सभी कफ सीरप को बनाने में तुलसी का इस्तेमाल किया जाता है। तुलसी की पत्तियां कफ साफ करने में मदद करती हैं। तुलसी की कोमल पत्तियों को थोडी- थोडी देर पर अदरक के साथ चबाने से खांसी-जुकाम से राहत मिलती है। चाय की पत्तियों को उबालकर पीने से गले की खराश दूर हो जाती है। इस पानी को आप गरारा करने के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

सर्दी से बचाव  बारिश या ठंड के मौसम में सर्दी से बचाव के लिए तुलसी की लगभग 10 – 12 पत्तियों को एक कप दूध में उबालकर पीएं। सर्दी की दवा के साथ-साथ यह एक न्यूट्रिटिव ड्रिंक के रूप में भी काम करता है। सर्दी जुकाम होने पर तुलसी की पत्तियों को चाय में उबालकर पीने से राहत मिलती है। तुलसी का अर्क तेज बुखार को कम करने में भी कारगर साबित होता है।

श्वास की समस्या श्वास संबंधी समस्याओं का उपचार करने में तुलसी खासी उपयोगी साबित होती है। शहद, अदरक और तुलसी को मिलाकर बनाया गया काढ़ा पीने से ब्रोंकाइटिस, दमा, कफ और सर्दी में राहत मिलती है। नमक, लौंग और तुलसी के पत्तों से बनाया गया काढ़ा इंफ्लुएंजा (एक तरह का बुखार) में फौरन राहत देता है।

गुर्दे की पथरी तुलसी गुर्दे को मजबूत बनाती है। यदि किसी के गुर्दे में पथरी हो गई हो तो उसे शहद में मिलाकर तुलसी के अर्क का नियमित सेवन करना चाहिए। छह महीने में फर्क दिखेगा।

हृदय रोग तुलसी खून में कोलेस्ट्राल के स्तर को घटाती है। ऐसे में हृदय रोगियों के लिए यह खासी कारगर साबित होती है।

नाव तुलसी की पत्तियों में तनाव रोधीगुण भी पाए जाते हैं। तनाव को खुद से दूर रखने के लिए कोई भी व्यक्ति तुलसी के 12 पत्तों का रोज दो बार सेवन कर सकता है।

मुंह का संक्रमण अल्सर और मुंह के अन्य संक्रमण में तुलसी की पत्तियां फायदेमंद साबित होती हैं। रोजाना तुलसी की कुछ पत्तियों को चबाने से मुंह का संक्रमण दूर हो जाता है।

त्वचा रोग दाद, खुजली और त्वचा की अन्य समस्याओं में तुलसी के अर्क को प्रभावित जगह पर लगाने से कुछ ही दिनों में रोग दूर हो जाता है। नैचुरोपैथों द्वारा ल्यूकोडर्मा का इलाज करने में तुलसी के पत्तों को सफलता पूर्वक इस्तेमाल किया गया है। तुलसी की ताजा पत्तियों को संक्रमित त्वचा पर रगडे। इससे इंफेक्शन ज्यादा नहीं फैल पाता।

सांसों की दुर्गंध तुलसी की सूखी पत्तियों को सरसों के तेल में मिलाकर दांत साफ करने से सांसों की दुर्गंध चली जाती है। पायरिया जैसी समस्या में भी यह खासा कारगर साबित होती है।

सिर का दर्द सिर के दर्द में तुलसी एक बढि़या दवा के तौर पर काम करती है। तुलसी का काढ़ा पीने से सिर के दर्द में आराम मिलता है।

आंखों की समस्या आंखों की जलन में तुलसी का अर्क बहुत कारगर साबित होता है। रात में रोजाना श्यामा तुलसी के अर्क को दो बूंद आंखों में डालना चाहिए।

कान में दर्द तुलसी के पत्तों को सरसों के तेल में भून लें और लहसुन का रस मिलाकर कान में डाल लें। दर्द में आराम मिलेगा।

मासिक धर्म में अनियमियता  जिस दिन मासिक आए उस दिन से जब तक मासिक रहे उस दिन तक तुलसी के बीज 5-5 ग्राम सुबह और शाम पानी या दूध के साथ लेने से मासिक की समस्या ठीक होती है और जिन महिलाओ को गर्भधारण में समस्या है वो भी ठीक होती है।

शीघ्र पतन एवं वीर्य की कमी तुलसी के बीज 5 ग्राम रोजाना रात को गर्म दूध के साथ लेने से समस्या दूर होती है।

ह भी जाने

तुलसी के पांच पत्ते और दो काली मिर्च मिलाकर खाने से वात रोग दूर हो जाता है।

कैंसर रोग में तुलसी के पत्ते चबाकर ऊपर से पानी पीने से काफी लाभ मिलता है।

तुलसी तथा पान के पत्तों का रस बराबर मात्रा में मिलाकर देने से बच्चों के पेट फूलने का रोग समाप्त हो जाता है।

तुलसी का तेल विटामिन सी, कैल्शियम और फास्फोरस से भरपूर होता है।

तुलसी का तेल मक्खी- मच्छरों को भी दूर रखता है।

बदलते मौसम में चाय बनाते हुए हमेशा तुलसी की कुछ पत्तियां डाल दें। वायरल से बचाव रहेगा।

शहद में तुलसी की पत्तियों के रस को मिलाकर चाटने से चक्कर आना बंद हो जाता है।

तुलसी के बीज का चूर्ण दही के साथ लेने से खूनी बवासीर में खून आना बंद हो जाता है।

तुलसी के बीजों का चूर्ण दूध के साथ लेने से नपुंसकता दूर होती है और यौन – शक्ति में वृध्दि होती है।

रोज सुबह तुलसी की पत्तियों के रस को एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर पीने से स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है।

तुलसी की केवल पत्तियां ही लाभकारी नहीं होती। तुलसी के पौधे पर लगने वाले फल जिन्हें अमतौर पर मंजर कहते हैं, पत्तियों की तुलना में कहीं अघिक फायदेमंद होता है।

विभिन्न रोगों में दवा और काढे के रूप में तुलसी की पत्तियों की जगह मंजर का उपयोग भी किया जा सकता है। इससे कफ द्वारा पैदा होने वाले रोगों से बचाने वाला और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाला माना गया है।

किंतु जब भी तुलसी के पत्ते मुंह में रखें, उन्हें दांतों से न चबाकर सीधे ही निगल लें। इसके पीछे का विज्ञान यह है कि तुलसी के पत्तों में पारा धातु के अंश होते हैं। जो चबाने पर बाहर निकलकर दांतों की सुरक्षा परत को नुकसान पहुंचाते हैं। जिससे दंत और मुख रोग होने का खतरा बढ़ जाता है।

तुलसी का पौधा मलेरिया के कीटाणु नष्ट करता है। नई खोज से पता चला है इसमें कीनोल, एस्कार्बिक एसिड, केरोटिन और एल्केलाइड होते हैं।

तुलसी पत्र मिला हुआ पानी पीने से कई रोग दूर हो जाते हैं। इसीलिए चरणामृत में तुलसी का पत्ता डाला जाता है।

तुलसी के स्पर्श से भी रोग दूर होते हैं। तुलसी पर किए गए प्रयोगों से सिद्ध हुआ है कि रक्तचाप और पाचनतंत्र के नियमन में तथा मानसिक रोगों में यह लाभकारी है।

इससे रक्तकणों की वृद्धि होती है। तुलसी ब्र्म्ह्चर्य की रक्षा करने एवं यह त्रिदोषनाशक है।

तुलसी के नुकसान

तुलसी के नुकसान भी हो सकते हैं क्या? आयुर्वेद में भी कहा गया है कि हर एक चीज का सेवन सेहत व परिस्थितियों के अनुसार और सीमित मात्रा में ही करना चाहिए, तभी उसका फायदा होता है। इस हिसाब से तुलसी के फायदे और नुकसान, दोनों जानना बहुत जरूरी है –

तुलसी में एंटीफर्टिलिटी गुण होते हैं, जिसके कारण इसका अधिक उपयोग पुरुषों में स्पर्म काउंट कम होने का कारण बन सकता है।

इस बात पर अभी कोई पुख्ता शोध उपलब्ध नहीं है, जिससे यह कहा जा सके कि यह गर्भवती और स्तनपान करवाने वाली महिलाओं के लिए सुरक्षित है। इस वजह से, इस दौरान तुलसी के नुकसान से बचने के लिए इसका सेवन करने से बचना चाहिए।

जैसा कि हमने ऊपर बताया कि तुलसी रक्त के थक्के बनने से रोक सकती है। इस कारण अधिक सेवन से यह खून को जरूर से ज्यादा पतला कर सकती है, जिससे रक्तस्राव की समस्या हो सकती है।

जो लोग मधुमेह की दवा ले रहे हैं, उन्हें भी तुलसी नहीं खानी चाहिए। इससे रक्त शर्करा का स्तर जरूरत से ज्यादा कम हो सकता है ।

तुलसी के पत्ते के फायदे जानने के बाद आप समझ ही गए होंगे कि क्यों तुलसी को इतना महत्व दिया गया है। इसकी मान्यता न सिर्फ धार्मिक आधार पर है, बल्कि वैज्ञानिक मापदंडों पर भी तुलसी के लाभ को प्रमाणित किया गया है। अगर आपके घर में तुलसी का पौधा नहीं है, तो जल्द से जल्द से उसे अपने आंगन या फिर बालकॉनी में रखें, ताकि भविष्य में जरूरत पड़ने पर आपको इसके लिए इधर-उधर भागना न पड़े। इस लेख में हमने आपको तुलसी के फायदे और नुकसान के बारे में विस्तार से बताया, जिसकी मदद से इसके उपयोग से जुड़ा निर्णय आप आसानी से ले पाएं।

तुलसी की चाय तुलसी के पत्ते, इसके रस और इसकी चाय को सही तरीके से इस्तेमाल में लाया जाए तो यह कई बड़ी बीमारियों से छुटकारा दिलाने में मददगार हो सकता है।

तुलसी का काढ़ा तुलसी की 10 -12 पत्तियां,एक इंच अदरक का टुकड़ा (कद्दूकस कर लें),पानी 4 कप,गुड़ 3 चम्मच या तीन छोटी डली,काली मिर्च,नींबू

बनाने की विधि सबसे पहले तुलसी की पत्तियों  को अच्छी तरह धो ले। अब पैन में पानी डालकर हल्की आंच पर उबलने के लिए रख दें। जब पानी गरम होना शुरू हो जाए तो इसमें तुलसी की पत्तियां, कालीमिर्च और अदरक डालकर 4-5 मिनट तक उबाल लें। इसके बाद इसमें गुड़ डालकर आंच बंद कर दें। काढ़े को चम्मच से थोड़ी देर तक चलाते रहें ताकि गुड़ अच्छे से घुल जाए। अब थोड़ा ठंडा होने के बाद थोड़ा नींबू निचोड़कर कप में छानकर गर्मागर्म पीएं। अगर फ्लेवर चाहिए तो इसमें एक इलायची भी कूटकर डाल सकते हैं या दालचीनी भी डाल सकते हैं।