अत्यधिक मूल्यवान होने के कारण कुछ रत्न ऐसे है , जिन्हें सामान्य जन खरीदकर धारण नहीं कर सकते | इसके आलावा अत्यधिक मूल्य चुकाने पर भी कई बार असली रत्न प्राप्त नहीं होते | हर एक आदमी को सही रत्न की परख भी नहीं होती | ऐसी अवस्था में सामान्य जन द्वारा उप रत्नों का उपयोग करना ही उपयुक्त है, क्योंकि उनका मूल्य भी उनकी क्रयशक्ति के अनुकूल होता है | और पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होने के कारण नकली (कृत्रिम) होने की संभावना कम रहती है और ग्रहों के अरिष्टनाशक गुण की दृष्टि से भी इनका अच्छा प्रभाव अनुभव किया गया है | जो गुण रत्नों में होते है वे ही उप रत्नों में भी होते है | अतः ग्रहों के अनुसार अरिष्ट (रोग) निवारणार्थ निम्न उपरत्न धारण किये जा सकते है –

ग्रह रत्न उपरत्न
सूर्य  
चन्द्र  
मंगल    
बुध  
बृहस्पति  
शुक्र  
शनि  
राहू  
केतु
माणिक्य
मोती  
मूंगा  
पन्ना  
पुखराज  
हीरा  
नीलम  
गोमेद  
लहसुनिया  
सूर्यकांत मणि ,या लालड़ी ,तामड़ा  
चंद्रकांत मणि ,  
विद्रुम मणि या संघ, मूंगी ,रतुआ ,लाल अकीक
मरगज ,जबर्जंद  
सोनल या सुनेला , 
कुरंगी ,दतला ,सिम्मा , तुरमली  
जमुनिया ,नीली ,लाजवर्त ,काला अकीक  
साफी ,तुरसा ,भारतीय गोमेद  
फिरोजा ,गोदंत ,संघीय  

 प्रमुख उप्रत्नों के विशेष गुण



तामड़ा – यह प्रदाहकारी रोगों को शांत करता है |मित्रता एवं प्रेम में स्थायित्व स्थापित करता है  तथा धैर्य एवं साहस प्रदान करता है |

चंद्रकांतमणि –स्मृति ,मानसिक शान्ति ,अनिद्रानाश ,ह्रदयकष्ट आदि के लिए विशेष लाभदायक |

रतुआ – रक्तस्राव रोकता है ,अर्बुद एवं ज्वरनाशक तथा स्वर (आवाज़ ) को स्पष्ट करता है |

सुनेला – कंठसम्बन्धी कष्ट ,ज्वर ,हैजा ,हिस्टीरिया ,ह्रदयस्पंदन ,वमन ,कामला ,दंत्कष्ट ,मासिक धर्मकष्ट और नपुंसकता में उपयोगी तथा जीवन को सुरक्षा प्रदान करता है |

मरगज – इस उपरत्न का प्रभाव पन्ना के सामान है |

तुरमली –  इसको मास्टर स्टोन भी कहा जाता है | यह उपरत्न जीवन की समस्याओं को शीघ्रता से हल करते हुए भौतिक सुख प्रदान करता है और कुछ बुरा फल नहीं देता है |

फिरोजा -यह गंभीर खतरों से रक्षा कर दीर्घायु प्रदान करता है | संतानोत्पादक एवं कामशक्ति में वृद्धि करता है |

आनेक्स – दाम्पत्यसुख प्रदान करता है ,विषैले जंतुओं के काटने से बचाता है |

कटेला – रतौंधी ,पक्षघात ,मासिकधर्म सम्बन्धी कष्टों में उपयोगी |

ओपल- स्मरणशक्ति में वृद्धि करता है |

दानाफिरेगा – गुर्दे से सम्बंधित कष्टों को दूर कर  सकता है |

रत्न एवं उपरत्न धारण करने से पूर्व किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श कर लेना चाहिए और रत्न धारण करने के अंगुली ,उपयुक्त तिथि ,नक्षत्र ,वार ,समय , नाग का वजन ,अंगूठी ,धातु आदि की जानकारी प्रापर कर लेनी भी आवश्यक है | रोग अथवा पीड़ाकारक गृह के मंत्र का जप  निश्चित संख्या में करते रहें | प्राणप्रतिष्ठा करने के पश्चात् धारण किया हुआ रत्न विशेष प्रभावकारी होता है |