जप के अनेक प्रकार है | उन सब को समझ ले तो एक जपयोग में ही सब साधन आजाते है | परमार्थ साधन के कर्मयोग ,भक्तियोग , ज्ञानयोग और राजयोग ये चार बड़े विभाग है | जपयोग में इन चारों का अंतर्भाव हो जाता है |

श्री गुरु से मंत्र दीक्षा लेकर साधन मंत्र का जप  आरम्भ करें | जिनके लिए सुविधा हो ,वे किसी एकांत ,पवित्र स्थान में ,नदी किनारे अथवा शिवालय में जप करें | जिनके लिए ऐसा सुभीता न हो वे अपने घर में ही जप के लिए कोई सुभीता स्थान बना लें | इस स्थान में देवताओं ,तीर्थों और साधू महात्माओं के चित्र रखें | उन्हें फूल माला चढ़ावें  धूप दें | स्वयं स्नान करके भस्म चन्दन लगाकर चैलाजिन कुशोत्तर आसन बिछाकर पूर्व या उत्तर दिशा की और  मुख करके कंधे पर उपवस्त्र धारण किये ,इष्ट देव और गुरु का स्मरण करते हुए आसन पर बैठे | जो नित्यकर्म करने वाले  है वे पहले संध्या वंदन कर लें तब प्रातःकाल में सूर्य  नारायण को नमस्कार करें ,पश्चात देव पूजन करके नित्य पाठ कर लें | जो संध्या अदि करना नहीं जानते (द्विजों को संध्या जाननी और करनी ही चाहिए ) वे पहले गंगा  नर्मदा आदि नामों से  शरीर पर जल मार्जन करें  तब एकाग्रचित्त हो ,सुर्यध्यान करके नमस्कार करें ,अनंतर अपने इष्ट देव का ध्यान करके गुरुमंत्र से सब उपचार उन्हें अर्पण करें फिर स्तोत्र पाठ आदि  करके आसन पर बैठे | आसन स्वस्तिक  ,पद्म अथवा सिद्ध इनमे से कोई भी हो | दृष्टि को नासाग्र करके प्राणायाम करें | अनंतर थोड़ी देर सावकाश पूरक  और रेचक करें | इसके बाद माला हाथ में लेकर जप आरम्भ करें | मेरु मनिका उल्लंघन न करें | अपनी सुविधा देखकर  जपसंख्या निश्चित कर लें और रोज़ उतनी संख्या पूरी करें और वह जप अपने इष्ट देव को अर्पण करें | इसके पश्चात   अपने इष्टदेव के पूर्ण और उपदेश कुछ पढ़ लें | श्री राम के भक्त  हों तो श्रीअध्यातं रामायण ,श्री रामगीता ,और श्री रामचरितमानस | श्री कृष्ण के भक्त हो तो श्रीमद्भागवत और श्री गीता पढ़ लें | अनंतर तीर्थप्रसाद लेकर उठें | इस क्रम से श्रद्धापूर्वक कोई साधना करें तो वह कृतार्थ हो जायेगा | यह सब तर्क से नहीं करके देखने से ही कोई भी जान सकता है | उसका चित्त आनंद से भर जायेगा | पाप, ताप दैन्य सब नष्ट  हो जायेगा | इश्वार्स्वरूप में चिर्विश्रान्ति प्राप्त होगी | सम्पूर्ण तत्वज्ञान स्फुरित होने लगेगा और शक्ति भी प्राप्त भी होगी | प्रत्येक देवता देवता के सहस्र नाम है प्रत्येक के अपने उद्देश्य है भक्त इनका उपयोग करें  |



प्रातः काल गीता आदि से  कोई श्लोक पढ़कर दिनभर उसका मनन करें | सांयकाल में पन्चोपचार  पूजा आदि होने के बाद जप करके सहस्र नाम से कोई नाम ध्यान में लेकर  उसके अर्थ का विचार करते हुए सो जायें | इससे शीघ्र सिद्धि प्राप्त होती है |

जप के कुछ मुख्य प्रकार ये है 

१ नित्य जप ,२- निमित्त का जप ,३- काम्य जप ,४-निषिद्ध जप ,५- प्रायश्चित जप ,6- अचल जप ,७- चल जप ,८-  वाचिक जप ,९- उपांशु जप ,१०- भ्रमर जप ,११- मानस जप ,१२- अखंड जप ,१३- अजपा जप और १४- प्रदक्षिणा जप इत्यादि |



जप के प्रकार अगले अंक में विस्तार से