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सप्त ऋषियों के नाम


सप्तर्षि (सप्त + ऋषि) सात ऋषियों को कहते हैं | जिनका उल्लेख वेद एवं अन्य हिन्दू ग्रन्थों में अनेकों बार हुआ है। वेदों का अध्ययन करने पर जिन सात ऋषियों या ऋषि कुल के नामों का पता चलता है वे नाम क्रमश: इस प्रकार है:- 1.वशिष्ठ, 2.विश्वामित्र, 3.कण्व, 4.भारद्वाज, 5.अत्रि, 6.वामदेव और 7.शौनक। 1.वशिष्ठ : […]

कुण्डलिनी शक्ति


कुण्डलिनी शक्ति को जाग्रत कर लेना बहुत ही जटिल प्रक्रिया है और यह एक अद्भुत और विचित्र अनुभव है जसकी कुण्डलिनी शक्ति जागृत है या सात चक्र जागृत है, वह साधारण मानव नहीं रह जाता है, वह एक योगिक और अलोकिक व्यक्ति हो जाता है, दुनिया के भौतिक सुखो से पर हो कर ईश्वर की […]

अष्टांग योग


अष्टांग योग – महर्षि पतंजलि ने योग को ‘चित्त की वृत्तियों के निरोध’ (योगः चित्तवृत्तिनिरोधः) के रूप में परिभाषित किया है। उन्होंने ‘योगसूत्र’ नाम से योगसूत्रों का एक संकलन किया जिसमें उन्होंने पूर्ण कल्याण तथा शारीरिक, मानसिक और आत्मिक शुद्धि के लिए अष्टांग योग (आठ अंगों वाले योग) का एक मार्ग विस्तार से बताया है। […]

ऐतिहासिक आयुर्वेदाचार्य


धन्वन्तरि धन्वन्तरि हिन्दू धर्म में एक देवता हैं। वे महान चिकित्सक थे जिन्हें देव पद प्राप्त हुआ। हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ये भगवान विष्णु के अवतार समझे जाते हैं। इनका पृथ्वी लोक में अवतरण समुद्र मंथन के समय हुआ था। शरद पूर्णिमा को चंद्रमा, कार्तिक द्वादशी को कामधेनु गाय, त्रयोदशी को धन्वंतरी, चतुर्दशी को […]

वैदिक शब्दावली


पंचरत्न -सोना , हीरा ,नीलमणि , पद्मराग ,और मरकत यह पञ्चरत्न कहलाते हैं | पंचपल्लव -बरगद,पीपल ,गूलर,पाकड़, आम के पत्ते पञ्चपल्लव कहलाते हैं | पंचगव्य  -गोमूत्र ,गोबर ,गाय का दूध गाय का दही, गाय का घी ,इन्हें मिलकर पंचगव्य बनाया जाता है | मात्र – छठा अंश गोमूत्र ,तीसरा भाग गोबर और दूध ,दो भाग […]

मन्वन्तर


मन्वन्तर एक संस्कॄत शब्द है, जिसका संधि-विच्छेद करने पर = मनु+अन्तर मिलता है। इसका अर्थ है मनु की आयु, प्रत्येक मन्वन्तर एक विशेष मनु द्वारा रचित एवं शासित होता है, जिन्हें ब्रह्मा द्वारा सॄजित किया जाता है। मनु विश्व की और सभी प्राणियों की उत्पत्ति करते हैं, जो कि उनकी आयु की अवधि तक बनती […]

जप के प्रकार एवं विधियाँ


जप के अनेक प्रकार हैं उन सबलो समझ लें तो एक जप योग में ही सब साधन आ जाते हैं | परमार्थ साधन के कर्मयोग ,भक्तियोग , ज्ञान और राजयोग ये चारो बड़े विभाग हैं | जप योग में इन चरों का अंतर्भाव हो जाता है |

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